बिना भयभीत हुए धर्म का निर्वाह करना चाहिये। कुसंगति का त्याग कर, गुरु कृपा प्राप्त करके सत्संग की तरफ अपना मन और ध्यान लगाना चाहिएःरामानुजदास (भैया जी)

नवभास्कर न्यूज. फरीदाबादः नवरात्रों के पावन अवसर पर सियाराम मंदिर ट्रस्ट ब्रह्मणवाड़ा बल्लभगढ़ द्वारा 17 से 25 अक्तूबर तक श्रीरामचरितमानस के पंचम सोपान श्री सुंदरकांड (राम कथा )का आयोजन किया जा रहा है। जिसमे बहुत ही सुंदर रामकथा कथा व्यास श्री सतना रामानुजदास (भैया जी) की मधुर वाडी द्वारा कही जा रही है। इस सुंदरकांड (राम कथा) का रसपान करके रामभक्त भी अपने जीवन को धन्य कर रहे है। कथा व्यास श्री सतना रामानुज दास जी ने राम भक्तो को बताया कि मर्यादा परुषोत्तम राम की कथा को पढ़ने के साथ साथ अगर इंसान उसको अपने जीवनशैली में उतार लें और व्यक्ति प्रभु राम जी के पद चिन्हों पर चलना शुरू कर दे तो उसको जीवन मे कोई कष्ट नही होगा

कथा श्रवण कर रहे भक्तो को कथा व्यास ने भगवान और भक्ति का अर्थ समझाते हुए कहा जो प्रभु का नाम जपता है संकीर्तन करता है उसकी भगवान स्वयं रक्षा करते है
कथा व्यास ने भक्तों को रामकथा सुनते हुए कहा कि बिना भयभीत हुए अपने धर्म का निर्वाह करना चाहिये। जीव को कुसंगति का त्याग कर, गुरु कृपा प्राप्त करके सत्संग की तरफ अपना मन और ध्यान लगाना चाहिए। संतों का संग करना चाहिए ताकि प्रभु श्री राम के चरणों में प्रीति हो जाये और इस सांसारिक आवागमन से छूट कर भगवत प्राप्ति कर सकें।
जिन्ह पायन के पादुकन्हि भरतु रहे मन लाइ। ते पद आजु बिलोकुहउँ इन्ह नयनन्हि अब जाइ।

(रिपोर्टः योगेश अग्रवाल.9810366590)

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