साहित्यकार एवं प्रोफेसर डॉ शंकरलाल सारस्वत का शरीर हुआ पंच तत्व में विलीन

नवभास्कर न्यूज. फरीदाबादः हिंदी व संस्कृत के महान साहित्यकार एवं अग्रवाल कॉलेज के हिंदी,संस्कृत विभाग के सेवा निवृत्त प्रोफेसर डॉ शंकर लाल सारस्वत का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ शंकर लाल सारस्वत अग्रवाल महाविद्यालय में 40 वर्ष तक हिंदी,संस्कृत विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्होंने अपने ज्ञान से कॉलेज से इतर लाखों विद्यार्थियों का जीवन आलोकित किया। उन्होंने अध्यापन से अलग समाज और सांस्कृतिक क्षेत्र में बहुत योगदान दिया। नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष पद पर रहकर सामाजिक क्षेत्र ,सांस्कृतिक क्षेत्र,साहित्यिक क्षेत्र में काफी योगदान दिया।नागरिक कल्याण समिति के अन्तर्गत उन्होंने मच्छर मारो अभियान,होम्योपैथिक औषधालय,वृक्षा रोपण,पर्यावरण सरक्षंण जैसे काफी कार्यक्रम अपनी देख रेख में आयोजित करवाये। उन्होंने संस्कृत,हिंदीं में दर्जनों शोधार्थियों का सम्यक प्रकार से मार्गदर्शन किया। संस्कृत व्याकरण के क्लिष्ट ग्रंथ पाणनि अष्टाध्यायी, सिंद्धांत क़ौमदी के सूत्रों की व्याख्या करने में वह सिद्धहस्त थे। उन्होंने अपने अध्यापन काल में लाखों सरस्वती साधकों का जीवन आलोकित किया। लोक प्रसिद्ध विद्वान सूरदास लक्ष्मण दास जी की आंख वाणी बनकर साहित्य साधना में सहयोगी रहे। उनकी अंतिम यात्रा में प्रो टीडी दिनकर,प्रो पीड़ी गौतम,उनके परम् शिष्य गुरु भाई डॉ बाँके बिहारी, कास्टिंग डारेक्टर राजेश गौतम,फ़िल्म कलाकार तथास्तु,अग्रवाल विद्य प्रचारिणी सभा के वरिष्ठ सदस्य दिनेश गुप्ता,नई कलम के अद्यक्ष प्रखर कवि सुरेंद्र नारायण,गीतकार राजेश खुशदिल, शायर भुट्टो खान,महाराष्ट नव निर्माण सेना के महा सचिव बड़े पुत्र वागीश सारस्वत आदि सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

(योगेश अग्रवाल.9810366590)

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